चरण 1: इहराम
मीक़ात (भारत से हवाई यात्रियों के लिए प्रायः यलमलम के ऊपर विमान में) पार करने से पहले ग़ुस्ल करें, पुरुष दो बिना सिली चादरें पहनें (महिलाएं साधारण शालीन लिबास), नीयत करें - लब्बैक अल्लाहुम्मा उमरतन - और तल्बिया पढ़ते रहें। इहराम की हालत में ख़ुशबू, बाल/नाखून काटना और सिले कपड़े (पुरुषों के लिए) मना हैं।
चरण 2: तवाफ़
मस्जिद अल-हराम पहुंचकर हजरे अस्वद (काले पत्थर) की सीध से शुरू करके काबा के सात चक्कर लगाएं, काबा आपके बाएं हाथ रहे। हर चक्कर पर कोई ख़ास दुआ तय नहीं - जो दिल से निकले मांगें। तवाफ़ के बाद मक़ामे-इब्राहीम के पीछे (या कहीं भी) दो रकआत पढ़ें और ज़मज़म पिएं।
चरण 3: सई
सफ़ा पहाड़ी से शुरू करके सफ़ा और मरवा के बीच सात फेरे करें (सफ़ा→मरवा = 1)। पूरा रास्ता वातानुकूलित गैलरी में है, करीब 3 किमी चलना होता है। व्हीलचेयर और इलेक्ट्रिक स्कूटर किराए पर मिलते हैं।
चरण 4: हल्क या कस्र
पुरुष सिर मुंडवाएं (हल्क, अफ़ज़ल) या पूरे सिर के बाल बराबर छोटे कराएं (कस्र); महिलाएं उंगली भर बाल काटती हैं। इसके साथ उमराह मुकम्मल - इहराम की पाबंदियां ख़त्म।
ज़रूरी बातें
- भीड़ सबसे कम: रात 11 बजे से फज्र तक।
- तवाफ़-सई में कुल 5–6 किमी चलना होता है - बुज़ुर्गों के लिए व्हीलचेयर पहले से बुक करें।
- नीयत के बिना मीक़ात पार न करें - यह सबसे आम ग़लती है।
सवाल-जवाब
उमराह में कितना समय लगता है?
आम भीड़ में 3–4 घंटे: तवाफ़ करीब 45–90 मिनट, सई 60–90 मिनट, बाकी समय आने-जाने और हल्क में।
क्या महिलाओं का इहराम अलग है?
महिलाओं के लिए कोई ख़ास लिबास नहीं - साधारण शालीन कपड़े। चेहरा ढकना इहराम में मना है।
तवाफ़ के हर चक्कर की कोई ख़ास दुआ है?
नहीं। रुक्ने-यमानी और हजरे अस्वद के बीच रब्बना आतिना... सुन्नत है; बाकी जगह अपनी भाषा में दुआ करें।
क्या बच्चे उमराह कर सकते हैं?
हां। छोटे बच्चों की ओर से अभिभावक नीयत करते हैं। स्ट्रोलर तवाफ़ की ऊपरी मंजिलों पर ले जा सकते हैं।